Tuesday, April 1, 2008

अनुवाद की परिभाषाएं (Translation Definition)

कांबले प्रकाश अभिमन्यू दि – ३१-०३-०८
एम.फिल.हिंदी अनुवाद
जे.एन.यू.
नई दिल्ली -६७



अनुवाद की परिभाषाएं

(Translation Definition)



अनुवाद संबंधी सिद्धांतों पर स्वतंत्र ग्रंथों का लेखन वस्तुत्: बीसवी शताब्दी में प्रारंभ हुवा। इसी शताब्दी के बौरान साहित्यिक और भाषा वैज्ञानिक पत्रिकाओं में अनुवाद पर लेखों का प्रकाशन प्रारंभ हुआ। इन्हीं भाषा वैज्ञानिक एवं साहित्यिक पत्र-पत्रिकाओं में अनुवाद की कई परिभाषाओं को जन्म दिया। कई परिभाषाओं पर सवाल भी उठाए गए तो कुछ परिभाषाओं को मान्यताएं भी मिली लेकिन आज भी अनुवाद की कोई एक परिभाषा नहीं मिलती है। परिभाषाओं पर विचार किया जाए तो अनुवाद की परिभाषा भाषा वैज्ञानिकों ने भी दी है और साहित्यकारों(कवियों) ने भी दी है।
भारतीय अनुवाद सिधांतकारों ने भी अनुवाद की परिभाषा दी है।
१. Dostert : - Meaning in our view is property of a language. An SL text has an SL meaning, and a TL text has a TL meaning.
डॅअ स्टर्ट : - “हमारे अर्थ विचार में भाषा का गुण है। किसी भी स्त्रोत भाषा के पाठ का अर्थ अपना होता है और लक्ष्य भाषा के पाठ का अर्थ भी अपना होता है।“

2. NIDA : - Translation consists in producing in the receptor language the close natural equivalent to the massage of the source language first in meaning and secondly in style.
नाइडा : - “अनुवाद का संबंध स्त्रोत भाषा के सम्देश का पहले अर्थ और फिर शैली के धरातल पर लक्ष्य भाषा के द्न्कटतम, स्वाभाविक तथा तुल्यार्थक उपादान प्रस्तुत करने से होता है।”

3. J.C.CATFORD : - “The replacement of textual material form one language by equivalent textual material in another language.”
कैटफर्ड : - “अनुवाद एक भाषा के पाठ्परक उपादानों क दूसरी भाषा के रुप में समतुल्यता के सिद्धात के आधार पर प्रतिस्ठापन है।”

4.FORESTEN : - “Translation is the transference of the content of text from one language into another, bearning in maind that we can, always disassociate the content from the forms.
फोर्स्टन : - “एक भाषा में अभिव्यक्त पाठ के भाव की रक्षा करते हुए – जो सदैव संभव नहीं होता – दुसरी भाषा में उतारने का नाम अनुवाद है।“

5.SAMUEL JOHNSON : - To translate is to change into another language retraining the sense.
सॅम्युअल जॅ न्सन : - “अनुवाद मुल भावों की रक्षा करते हुए उसे दूसरी भाषा में बदल देना है।”

6.JOHN CONINGTON : - A translation ought to endeavour not only to say what his author has said, but to say it as he said it.
जॅअन कॅअन्गटन :- “अनुवादक को उसके अनुवा का तो प्रयास करना ही है, किंतु जिस ढंग से कहा है उसके निर्वाह का भी प्रयाक सरना चाहिए।”

7.MATHEW ARNOLD : - A translation shoul affect as in the same way as the original may be supposed to have affected its first hearers.
मैथ्यू अऍर्नाल्ड : - “अनुवाद ऎसा होना चाहिए कि उसका वही प्रभाव पडे जो वूल का उसके पहले श्रोताओं पर पडा होगा। ”

8.WILLIAM KUPAR : - Fidelity indeed is of very essence of translation and the term itself implies it.
विलियम कपूर : - “अनुवाद की निष्ठा ही उसकी आत्मा है और फिर निष्ठा का अर्थ भी तो यही है।”

9.ARL RSKOMAN : - “YOUR AUTHOR ALWAYS WILL BE BEST ADVICE. Fall when he falls and when he rises rise”.
अर्ल रस्कोमन : - “ मूल लेखक का अनुसरण करना सर्वोत्तम है, उकीके शाथ गिरो, उसी के साथ उठो।”

10.ALEKZENDER POPE : - The fire of the poem is what the translator sould principally regarded as it is most likely to expire in his managing.
कविता की मूल चेतना अथवा उपमा की ओर ही अनुवाद का सर्वाधिक ध्यान होना चाहिए, नहीं तो वह अनुवाद के दौरान ही नष्ट हो जाएगी।”

11.ALEKZENDER FREZER TITLAR : -“(1) A translation should give a complete transcript of the ideas of the original work.
(2)the style and manner of writing should be pf the same character as that of the original.
एलेक्जेंडर फ्रेजर टिटलर : - “अनुवाद में मूल का संपूर्ण भाव समाहीत होना चाहिए, अनुवाद की शैली तथा लेखन विधि मूल की जैसी होनी चाहिए।”

12.JULIANE HOUSE : - “Translation is the replacement of a text in the source lanuage by a semantically and pragmatically equivalent text in the trget language…translation oral texts is called interpretation”.
जुलियन हाऊस : - “स्त्रोत भाषा की पाठ्य सामग्री का लक्ष्य भाषाकी अर्थ तठा व्यवहार की दृष्टि से समतुल्य पाथ्यसामग्रि से प्रतिस्थापन है…मौखिक, सामग्री का अनुवाद आशु अनुवाद कहलाता है।”

13.BASU : - “The word ‘Anuvad’ means repetation by way of explanation, illustration or corroboration, that is to say when a speaker demonstrates for some special purpose, a proposition which had already been demonstrated beore, that is called ‘ANUVAD’. ”
( Ashtadhyayi of panini, Vol 1 page 308 )


14.APTE : - (आपटे :- संस्कृत:अंग्रेजी कोशकार) “(1) repetition by way of explanation, illustration corroboration, (2)Explanatory repletion or reference to what is already mentioned, particularly any portion of the Brahmans, which comments on, illustrates or explains a VIDHI or direction previously laid down and which does not itself lay down any direction corroboration”.
१५. Dr.Jonson : - “अनुवाद का आश्य अर्थ को अक्षुण्ण रखते हुए अन्य भाषा में अंतरण करना।”

१६. ए.एच.स्मिथ : - “अनुवाद का तात्पर्य अर्थ को यथासंभव बन्नए रखते हुए अन्य भाषा में अंतरण से है।”

१७.रोमन जैकबसन :- “समस्त प्रकर का अनुवाद कर्य अलोचनात्मक व्याख्या है।”

१८.मेदनिकोवा :- “अनुवाद एक तरह से टीका-टिप्पणी करता है।”

१९ टैंकोक : - “अनुवादक का कार्य द्विमुख होता है – पहले तो उसे मूल के अर्थ का ठीक-ठीक अनुवाद करना होता है और दूक्सरा उसे मूल की शैलीगत विशेषताओं को भी अनुवाद में उतारना है।”

२०.न्यूमार्क : - “अनुवाद एक शिल्प है जिसमें एक भाषा में लिखित संदेश के स्थान पर दूसरी भाषा के उसी संदेश को प्रस्तुत करने का प्रयत्न किया जाता है।”

२१.हार्टमन तथा स्टार्क : - “मक भाषा या भाषाभेद से दूसरी भाषा या भाषाभेद में प्रतिपाद्य को स्ठानंतरित करने की प्रक्रिया करने की प्रक्रिया या उसके परिणाम को अनुवाद कहते हैं।”

२२.हैलिडे : - “अनुवाद एक संबंध है जो दो या दो से अधिक पाठों के बीच होता है, ये पाठ समान स्थिति में समान प्रकार्य सम्पादित करते हैं। दोनों पाठों का संदर्भ समान होता है और उसे व्यंजित होनेवाला संदेश भी समान है।”

२३.सपिर(sapir) : - “मक सभ्यता के एक प्रतिनिधित्व की दृष्टि से दो भाषाएँ समान नहीं हो सकती। कारण दो सभ्याएँ जिन समाजों में जीती हैं उनके अपने-अपने संसार है। इस प्रकार स्पष्ट है की अनुवद में मात्र भाषिक परिवर्तन नहीं होता, प्रत्युत उसमें सभ्यता का रुपांत्रण औएक्षितहै। रुपांत्रण निकटतम ही संभव है।

२४.प्योडोर एच.सेवरी(Savory) : - “अनुवाद प्राय:उतना ही प्राचीन है जितना मेल लेखन और उसका इतिहास ही भ्व्य हौर जटिल है जितना साहित्य की किसी दूसरी शाखा का।”

२५. Dr.गार्गी गुप्त : - “अनुवाद प्रक्रिया के दो मुख्य अंग होते हैं। अर्थबोध और व्याकरण सम्मत भाषा में स्पष्ट संप्रेषण। इसीलिए अनुवाद की निष्ठा दोवुखी होती है, मूल रचनाकर के प्रति अर्थबोध की दृष्टि से और पाठक के प्रति शुद्ध तठा सुबोध संप्रेषण की दृष्टि से। मूल हचना की जो संकल्पनाएँ अथवा स्थितियाँ औदित रचना के पाठक के लिए अज्ञात अस्पष्ट या दुऋह हों, उनकी व्याख्या, स्पष्छीकरण, अंतर्संबंधों का विवरण देना अत्यावश्यक है। यदि हम पाथक की वुल रचना की मनोहारी भूमि में संदेह ले जाना चाहते हैं तो उसका वह मनोहर स्वरुप यथावत उसके मन में भी प्रतिबिम्बित होना चाहिए।”

२६.जी.गोपीनथन : - “अनुवाद वह द्वंद्वात्मक प्रक्रिया है जिसमें स्त्रोत पाथ की अर्थ संरचना(आत्मा) का लक्ष्य पाठ की शैलीगत संरचना ( शरीर ) द्वारा प्रतिस्थापन होता है।”

२७.Dr.कृष्णकुमार गोस्वामी : - “एक भाषा में व्यक्त भावों या विचारों को दूसरी भाषा में समान और सहज रुप से व्यक्त करने का प्रयास अनुवाद है।”

२८.पट्टनायक : - “अनुवाद वह प्रक्रिया है जिसके द्वारा सार्थक अनुभव (अर्थपूर्ण संदेश या संदेश का अर्थ) को एक भाषा-समुदाय से दूसरे भाषा समुदाय में संप्रेषित किया जाता है।”

२९.Dr. सुरेशकुमार :- “एक भाषा के विशिष्ट भाषा भेद के विशिश्ट पाठ को दूसरी भाषा में इस प्रकार प्र्स्तुत करना अनुवाद है जिसमें वह मुल के भाशिक अर्थ, प्र्योग के वैषिश्ट्य से निष्पन्न अर्थ, प्रयुक्ति और शिली की विशिषता, क्विशय वस्तु तथा संबंध सांस्क्रुतिक वैशिश्ट्य को यठासंभव संरक्षित रखते हुए दूसरी भाषा के पाठक को स्वाभ्हाविक रुप से ग्राह्य प्रतित होता है।”

३०.Dr. रवींद्रनाथ श्रीवास्तव : - “एक भाषा(स्त्रोत भाषा) की पाठ सामग्री में अंतर्निहीत तथ्य का समतुल्यता के सिधांत के आधार पर दूसरी भाषा (लक्ष्य) में संगठनात्मक ऋपंतरण अथवा सर्जनात्मक पुनर्गठन को ही अनुवाद कहा जाता है।”

३१.Dr. भोलानाथ तिवारी : - भाषा ध्वन्यात्मक प्रतीकों की व्यवस्था है और अनुवाद है व्न्हीं प्रतिकों का प्रतिस्थापन, अर्थात एक भाषा के स्थान पर दूसरी भाषा के निकटतम ( कथनत:और कथ्यत:) समतुल्य और सहज प्रतीकों का प्रयोग। इस प्रकार अनुवाद निकटतम, समतुल्य और सहज प्रतिप्रतीकन है।

Saturday, March 15, 2008

the great translator photo


Ferdinand_de_Saussure





John Dryden






Ignacy Krasic








Roger-bacon-statue







St Jerome










Samuel johns










Luther




Friedrich_Daniel_Ernst_Schleiermacher








Johann_Gottfried_Herder










CiceroBust










Wednesday, March 12, 2008

Abrivation In Machine Translation

1 AT Adequate Translation

2 HAMT Human Aided machine Translation

3 HT Human Translation

4 MAHT Machine Aided Human Translation

5 MT Machine Translation

6 RL Receptor Language

7 SL Source Language

8 SLT Source Language Text

9 TL Target Language

10 TLT Target Language Text

11 A Adjective

12 ALO Allomorph

13 ALPAC Automatic Language Processing Advisory Committee

14 ART Article

15 ATN Augmented Translation

16 CAT Category

17 CEC Commission Of European Communities

18 CETA Centre d Etudes pour la tradition Automatipue

19 CLS Conditional Limitique Semantics

20 COP Copular

21 CPU Central Processing Unit

22 CSIR Common Sense In Ference Rule

23 Det Determiner

24 FS Function Syntactique

25 GB Government and Binding

26 GETA Group d Etudes Pour la Traducation automatique

27 GN Group nominal

28 GOV Governor

29 Indobj Indirect Object

30 INST Instrument

31 IR Inter Mediate ( or Interface ) Representation

32 LDB Lexical Database

33 LDCS Lexical Data Control System.

34 LHS Left hand side

35 LRC Linguistic research Centre

36 LS Limited Semantics

37 LSP Language For Special purposes

38 MAT Machine Aided Translation

39 N Noun

40 NP Noun phrase

41 NBR Number

42 OCR Optical Character Recognition

43 PAT Patient

44 PHVB Phrase Verbal (VP)

45 SP Spell Checking

46 GC Grammar Cheeking

47 CR Character Recognition

48 OCR Optical Character Recognition

49 WK World knowledge

50 GC Grammar Categories

51 CF Contextual Features

52 FAGPMS Fully Automatic General Purpose Machine Translation System

53 DMTS Direct Machine Translation System

54 AI Artificial Intelligence

55 TGG Transformational Generative Grammar

56 CG Case Grammar

56 PG Paninian Grammar

57 MHRD Ministry of Human Resource Development

58 NL Natural Language

59 NLI Natural Language Interface

60 ACL Association of Computational Linguistics

61 FOL First Order Logic

62 TMS Terminology Management System

63 EBMT Example based Machine Translation

64 HTML Hypertext Mark-up Language

65 DBCS Double byte Character Set

67 MI Mutual Information

68 RTF Rich Text Format

69 TM Translation Memory

70 TMX Translation Memory Exchange

71 XML Extensible Mark-up Language

72 MA Morphological Analyser Synthesis

73 MS Morphological Synthesis

74 BD Bilingual Dictionary

75 CT Computational Techniques

76 GTA General Translation Approach

78 LT Linguistic Techniques

79 PSG Phrase Structure Grammar

80 SF Semantic Features

81 ALA Allomorphic Lexical Analysis

82 AE Application Envirment

83 HL High Level

84 LL Low Level

85 MG Morphological Generation

86 ST Structural Transfer

87 TXT Text sentence

89 CS Complex sentence

90 S Sentence

91 VP Verb phrase

92 PREV Preverbal Field

93 VG Verbal phrase

94 POST Post verbal Field

95 CNG Complex Noun group

96 RELC Relative Clause

97 Nog Nominal Group

98 Pg Prepositional Group

99 Fiv Finite Verb form

100 Rel Relative word

101 POS Part of Speech

102 PS Production systemc

103 PS Preference Semantics

104 PW Principal word

105 RHS Right Hand Side

106 RL Relation Logique (Logical Relation)

107 RT Root of Transition Network

108 SING Singular

109 SL Source Language

110 TAUM Traduation Automatioqu De l`Universite de Montr`eal

111 TG Transformational Grammar

112 TG Topical glossary ( in SYSTRAN)

113 TL Target Language

114 TR Transformational Rule

115 TS Transformational System

116 UL 0Unite Lexical ( Lexical Unit )

117 VP Verb Phrase

118 WSD Word sense Disambiguation

119 RA Relational Ambiguity

120 RDBMS Relational Database Management System

121 TD Terminology Databank

123 SA Syntactic analyser

124 SA Sema ntic Analyser

125 CA Contextual Analyser

126 CD Contextual Analyser

127 CD Conceptual Dictionary

128 LFG Lexical Functional Grammar

129 SLD Source Language Dictionary

140 TLD Target Language Dictionary

141 STTMT Statistical machine Translation

142 UCSG Universal Clause Structural Grammar

143 UNL Universal Networking Language

144 TT Target Text


145 ST Source Text

LEXICAL AMBIMUITY IN HINDI – MARAHI MACHINE TRANSLATION SYSTEM IN

हिंदी मराठी मशीनी अनुवाद में शाब्दिक अस्पस्टता ( समान उच्चारण वाले शब्दों के संदर्भ में )

LEXICAL AMBIMUITY IN HINDI – MARAHI MACHINE TRANSLATION SYSTEM IN
(IN THE CONTEXT OF HOMONMYS)
Kamble Prakash Abhimannu JNU N.Delhi – 67


प्रस्तावना : -
आधुनिकिकरण् के युग में भारतीय विद्वान यह कभी नहीं भूल सकते की भारत एक बहूभाषिक देश है । बहुभाषिकता की कमस्या को अनुवाद के मध्यम के दूर किया गया लेकिन आई टी के युग में भाषा का मुकाबला मशीन से है । “मशीनी अनुवाद के क्षेत्र में वर्तमान युग में इआश्विक स्तर पर प्रमुख निम्न समस्याऎं हैं । जिनका निहाकरण अभी नहीं हो पाया है । समान अर्थ वाले शब्द , समान उच्चारण वाले भिन्नार्थक शब्द , वाक्यगत द्विअर्थकता , संदर्भ परक द्विअर्थकता , अस्पष्ट पद , संकेत , कहावते , मुहावरे , विकसित नए शब्द आदि । “Homonym” शब्द ग्रीक के homo + onyms इन शब्दों के पूर्वसर्ग और परसर्ग से homonym शब्द बना है । जिसका हिंदी अर्थ “ समान उच्चारण वाले शब्द ” है । समान उच्चारण वाले शब्दों से छोटे बच्चे , सामन्य पाठक , श्रोता आदि के मन में भी समस्याऎं उत्पन्न होती है । मानव अपनी कुशल बुद्धि , पूर्व संदेशोंकी सहायता , शारिरीक गतिविधियों को देखते हुए संदेशों का अर्थ समजता है । यह प्रक्रिया पूर्ण रुप से मानवी मस्तिष्क पर आधारित है , जिसे कोश , वैश्विक ज्ञान एवं भाषिक ज्ञान की सहायता होती है । इस समस्या का निराकरण करने के लिए मशीन को मशीनी भाषा से अवगत कराया जाता है लेकिन यह भाषिक साधन विकसित नहीं हुए है ।
मशीनी अनुवाद की समस्याऒं से मशीनी अनुवाद में Homonyms ( समान उच्चारण वाले शब्दों की समस्या ) गंभीर रुप से सामने आई । समान उच्चारण वाले शब्दों के निराकरण की समस्या विश्व से कई मशीनी अनुवाद यंत्रों को है । मशीनी अनुवाद में वैश्विक स्तर की समस्या पर हिंदी – मराठी मशीनी अनुवाद में यह पहला अनुसंधान होगा ।
मशीनी अनुवाद में वाक्य एवं शब्द की द्विअर्थकता का समाधान करने की प्रक्रिया Word Sense Disambiguter में होती है । जिसे Grammatical Ambiguity एवं Lexical Disambiguity इन दो भागों में देखा जाता हैं । Lexical Disambiguyter शब्दों की प्रयोजनमूलकता, भाषा वैज्ञानिक रुपों एवं व्याकरणिक कोटियों के अनुसार शब्दों को विभाजित करता है । Lexical Ambiguity में दो प्रकार की द्विअर्थकता होती है Polysemy और Homonym. Homonyms से उत्पन्न द्विअर्थकता अधिक कठिनाइयाँ उत्पन्न करती है । Homonyms को निम्न रुप से विभाजित किया किया जाएगा ।

क्र. वर्तनी उच्चारण अर्थ
१. समान वर्तनी समान उच्चारण भिन्न अर्थ
२. समान वर्तनी ( भिन्न व्याकरण ) भिन्न उच्चारण भिन्न अर्थ
३. भिन्न वर्तनी समान उच्चारण भिन्न अर्थ

(नामों में अधिकतार समान उच्चारण वाले भिन्नर्थक शब्दों को देखा जाता हैं )
जैसे : -
क्र. हिंदी व्याकरणिक कोटि मराठी अर्थ
१. पंकज नाम कमळ जलज, कमल क फूल
२. पंकज नाम पंकज लडके का नाम
३. पर कारक पर , परंतू लेकिन , परंतु
४. पर नाम पंख पक्षी
५. कर नाम कर , हाथ कर , हाथ
६. कर क्रिया करणे करना

हिंदी – मरठी में एसे कई शब्द है जिनके उच्चरण , वर्त्नी और् अर्थ समान है जैसे : - साल – वर्ष , साल – फल का छिल्का या पेड की छाल । स्त्रोत भाषा मे आए किसी श्ब्द की लक्ष्य भाषा में
“ समान उच्चारण , कमान वर्तनी , समान अर्थ हो सकता है “ । “समान उच्चरण वाले शब्दों की समस्या स्त्रोत भाषा एवं लक्श्य भाषा दॊनों भाषाऒं में एक ही शब्द के समान उच्चारण वाले दो अर्थ होते है । इन समस्याओं के काहण अनुवादक गलतियाँ करता हैं । यही समस्या मशीनी अनुवाद करेगी । इस शोध में इस समस्या पर भी विचार किया जाएगा ।

व्याकरणिक एवं भाषा वैज्ञानिक नियम : - मशीनी अनुवाद में व्याकरण महत्वपूर्ण होता है । अंग्रेजी भाषा की वाक्य रचना ( कर्ता – कर्म - क्रिया ) इस प्रकार की है । दोनॊं भाषाऒं की वाक्य रचना भिन्न होने के कारण कई व्याकरणिक समस्याएँ उत्पन्न होती है । हिंदी मराठी एक ही भाषा परिवार से होने से हिंदी – मरठी भाषा की वाक्यसंरचना ( कर्ता – कर्म - क्रिया ) समान है । जिसका उपयोग वाक्य के अर्थ को स्पस्ट करने में होग ।
शोध प्रविधि : - शोध की प्रविधि मात्रात्मक एवं गुणात्मक होगी । जिसमें भाषा की व्याकरणिक कोटियों की समानताओं के कारण व्याकरणिक सूत्र परक ( Rule-based ) मशीनी अनुवाद यंत्र के निर्माण में कार्य करना उचित होगा । मात्रात्मक प्रविधि में व्याकरणिक नियमों एवं भाषा वैज्ञानिक रुपों को नियमबद्ध किया जाएगा । इस अनुसंधान में java programming language क उयोग होगा । अनुसंधान के उपयोग के लिए अनुसंधान को Internet कि शायता से अन्य विश्वविद्यालयों , मशीनी अनुवाद यंत्र निर्माण में कार्य कर रहें संस्थानों एवं अनुसंधान कर्ताओं से भी इस विषय पर विचार किया जा सकें । अनुसंधान के लिए मशीनी अनुवाद के अन्य भाषिक साधनों की सहायता ली जाएगी । १.वाक्य विश्लेशक ( Tagger ) 2.शब्द विश्लेशक ( Chunker ) 3.कार्पस( corpus ) ४.कंम्पूटरी कृत कोश ( Computational Dictionary )
अनुसंधान का प्राथमिक उपयोग : - यह अनुसंधान का निम्न मशीनी अनुवाद यंत्रों में उपयोग होगा । १.शब्दबंध हिंदी मरठी आन ( Shabdabandha Hindi to Marathi Online Dictionary ) २.भारतीय भाषा से भारतीय भाषाओं के अनुवाद के लिए ।
भारतीय भाषाओं में मशीनी अनुवाद को मिली इस गति को सफल करने के लिए यह अनुसंधान अवश्य सहायक होगा । प्रस्तवित शोध का अध्याय विभाजन
प्रस्तावना : -
१.मशीनी अनुवाद की समस्याऎं
१.वैश्विक स्तर पर अनुवाद की समस्याऎं
२.भारत में मशीनी अनुवाद की समस्याऎं
२.समान उच्चारण वाले शब्दों से अनुवाद एवं मशीनी अनुवाद में निर्माण होने वाली समस्याऎं
१. मानव द्वार होने वाले अनुवाद एवं मशीनी अनुवाद समान उच्चारण वाले शब्दों की समस्याऎं
२. समान उच्चारण वाले शब्दों के प्रकार एवं व्यकरणीक सूत्र
३.हिंदी मराठी मशीनी अनुवाद समान उच्चारण वाले शब्दों की समस्याओं का भाषिक सूत्र
१.समान लिपी , समान उच्चारण , भिन्नार्थक शब्द
२. समान लिपी , भिन्न उच्चारण , भिन्नार्थक शब्द
३. भिन्न लिपी , समान उच्चारण , भिन्नार्थक शब्द
४. समान उच्चारण वाले शब्दों की समस्याओं का निराकरण कंपूतरी भाषा के रुप में
१. व्याकरणिक एवं भाषा वैज्ञानिक नियम
२.कंम्पूटर प्रोग्रामिंग भाषा
५. उपयोग
१.भारतीय भाषा से भारतीय भाषा के कंम्पूटरी कृत कोश के लिए
२.भारतीय भाषाओं से भारतीय भाषाओं के मशीनी अनुवाद में
उपसंहार

Monday, March 10, 2008

सांस्कृति, संप्रेषण और अनुवाद

दिनांक :- ११/०३/०४
पेपर
नं. ७०४



सांस्कृति, संप्रेषण और अनुवाद

प्रस्तावना : -


संस्कृति और संप्रेषण समाज के महत्व पूर्ण अंग है जिसके बिना कोई भी समाज पूर्ण नहीं हो सकता। संस्कृति समाज की पहचान होती है। " डे फेस्टिवल " की संस्कृति ने भारतीय संस्कृतिक मूल्यों को जड़ से हीला कर रखा दिया । तो दूसरी ओर संप्रेषण साधनों के आविष्कारों ने सजीव संप्रेषक को निर्जीव संप्रेषक में बदल दिया हैं। समाज में संप्रेषकों को भी संस्कृतिक महत्व होता था जिसका अंत हो चूका हैं। मानव का संपूर्ण व्यवहार और आचरन ही उसकी "संस्कृति" है । इन शब्दों में उसकी सभ्यता समाहीत है, लेकिन किसी की असभ्यता भी उसकी "संस्कृति" हो सकती है ।
जैसे हम Teenage Culture, Male Culture, Female culture, working class Culture, Bakers Culture, Culture of City, State, and Culture of Nation के रुप मे देख सकते है।
मानव जाति के संस्कृतिक प्रथाओं एवं मान्यताओं का भाषिक विश्लेषण मानव विज्ञान में अवधारना के रुप मे किया जाता हैं। भाषा का अध्यन बिना उसकी संस्कृति को जाने करना अस्मभव है ।
संदेशों को संकेतो द्वार व्यक्त करने की प्रक्रिया संप्रेषण है।
संस्कृतिक सम्प्रेषण की स्थिति को उदरीकरण पूर्व एवं उदरीकरण के बाद की परस्थिति इन दो भागों में विभाजित कर देख सकते हैं। प्रमुख रुप से हम विचार कर सकते है, कि उदारीकरण पूर्व समाज में रीति-रिवाज, उत्सव, त्योहार, देव–देवता, उपासनाविधि आदि में कुछ बदलाव दिखाई देता, तो कई बार नई धारणाओं का भी जन्म होता था। उदारीकरण और जागतिकरण के पश्चात रहन-सहन, खान-पान, आचार-विचार, काम आदि में मूल रुप से भेद दिखाई देता है लेकिन नई सांकृतिक संकल्पनाओं का निर्माण नहीं हो पा रहा है। भारत जैसे सांस्कृतिक देश में जहां महिनों में नई संस्कृतिका निर्माण होता वहीं आज पाश्चात्य देशों की संस्कृति से प्रभावित हो रहा है। जिससे केवल समाज को ही नहीं बल्कि पर्यावरण पर भी इसका विपरीत परिणाम हो रहा हैं।

"सम्प्रेषण" के लिए भाषा ही सम्प्रेषण का एक मात्र साधन नहीं है, हम शारिरीक चेष्टाओं, मुख मुद्राओं एवं सहज वाचिक उत्तेजनाओं से भी अपने भावों, विचारों को सम्प्रेषित करते है। लेकिन शारिरीक क्रियओं से होने वाले सम्प्रेषण को सम्प्रेषण की भाषा नहीं कह सकते। सम्प्रेषण के लिए यह आवश्यक है कि उत्तेजना के संचरण के द्वार श्रोता में प्रतिक्रिया उत्पन्न हो। सूचना का यथार्थ रुप में संवहन ही सम्प्रेषण है। सम्प्रेषण को प्रमुख दो विभागों में देखा जाता हैं।

१. ध्वनि रहित सम्प्रेषण २. ध्वनि सहित सम्प्रेषण ।

इन दो प्रकारों की समस्याएं भी अलग-अलग हो सकती है । ध्वनि सहित संप्रेषण में मुख्य रुप से मनुष्य के वाचिक संप्रेषण को देख सकते है । ध्वनि रहित संप्रेषण में लिखित रुप को, या शारिरीक क्रियाओं को देख सकते हैं।

संस्कृतिक संप्रेषण में अनुवाद के पक्ष : - संस्कृतिक अवधारना को पूर्ण रुप से समझ ने और संप्रेषित करने के लिए निम्न पक्ष अधिक सहायक होंगे।

१. ईश्वर की संक्लपना

२. कला और नृत्य

३. विवाह, मृत्यु संस्कार और प्रसुति पूर्व एंव बाद के संस्कार (Maternity system)

४. संस्कृतिक अर्थ की समानता ( स्थान के संर्दभ में )

५. सांस्कृतिक ध्वनि

६. राजनीतिक और आर्थिक गतिविधियाँ

७. विचारधारा

८. सांस्कृतिक उत्सव (कार्यक्रम)

९. अनुवाद की संकल्पना

संस्कृतिक संप्रेषण के लिए समाज एवं पाठ की इन गतिविधियों को ध्यान में रखना आवश्यक होगा। स्थान से तात्पर्य यह है कि संस्कृतिक परिवेश की भौगोलिक परस्थिति।

संस्कृति और संप्रेषण के सेतू : - "भाषा" संस्कृतिक संप्रेषण का सर्वाधिक महत्व पूर्ण साधन है जिसके बिना मानव सफल संप्रेषण ना कर पाता था ना कर पाएगा। एक भाषा दूसरी भाषा से कुछ संस्कृतिक शब्द लेती है, तो कुछ संकृतिक शब्द अन्तरराष्ट्रीय होते है, जिनका अनुवाद करने आवश्यकता नहीं होती । कहावते, मुहावरे, लोकोक्तियाँ भी संस्कृतिक संप्रेषण के स्त्रोत है। समाज में
संस्कृतिक सम्प्रेषण को साहित्य ने सर्वाधिक सहायता प्रदान की है। आज भी सहित्य ही एक ऎसा माध्यम है जिससे संकृतिक मूल्यों का पूरी निष्ठा के साथ आदान-प्रदान होता हैं। फिल्म, व्यवसाय, नाटक, गीत, धार्मिक कार्यक्रमों के आयोजन, आदि को भी संस्कृतिक सम्प्रेषण के साधनों के रुप में देखा जा सकता हैं । लेकिन इन माध्यमों की एक विशिष्ट सीमा होती है। संप्रेषण साधनों के आविष्कारों के कारण आज संप्रेषण साधन पूर्ण रुप से बदल गए है। जहां मानव ने संप्रेषण के साधन के रुप मे कबूतर, आदमी और जानवरों का उयोग किया तो आज मोबाईल, कंपूटर, इंटरनेट, फोन, दूरदर्शन, रेडियो, एफएम आदि का उपयोग किया जा रहा हैं। यह सबसे महत्व पूर्ण और सोचनिय विषय है कि इन माध्यमों से संप्रेषण अधिक गति से होता है लेकिन सांस्कृतिक संप्रेषण प्रभावि रुप से नहीं होता। जिसके कारण संस्कृतियों का महत्व भी कम होता जा रहा है।

संस्कृतिक अनुवाद में संप्रेषण की समस्याएं : - संस्कृतिक समस्याऎं सहित्यिक (लिखित)' मौखिक और व्यवहारीक रुप में आने वाली समस्याऎं होती हैं जिनकी समस्याएं संप्रेषण में भी समान रुप से दखी जा सकती है । जैसे : - किसी एक भाषा में किस वस्तू, रंग, या स्थान को धार्मिक रुप से महत्व होगा यह नहीं समझ सकते । तो कई बार दूसरी भाषा सिखने वाला व्यक्ति आदर सूचक शब्द, लिंग, वचन में मौखिक रुप से उच्चारण में गलतियां करता है। जिससे संप्रेषन की प्रक्रिया मे समस्याऎं निर्माण होती है। संप्रेषण प्रक्रिया का प्रकार भी संप्रेषण सफल करने में महत्व पूर्ण भूमिका निभाता है। इसमें अगर दूविधा उत्पन्न हो जाए तो संप्रेषण में समस्या निर्माण हो सकती है। संकृतियों का सामाज पर आधिक तर परिणाम इस लिए होता है कि संकृति मनुष्य में संवेदना, भाव-भावना निर्माण करने का महत्व पूर्ण कार्य करती है। संप्रेषण प्रक्रिया सफल होने के लिए उत्तेजना के संचरण के द्वार श्रोता में प्रतिक्रिया उत्पन्न होना आवश्यक होता है लेकिन एक संकृति का संवहन उसी रुप में होना संभव नहीं हो पाता एसी परस्तिथि में संप्रेषक को दोष दिया जाता है । विश्वमैत्रि और विश्वबंधूत्व की संकल्पना के कारण दूसरी संस्कृति को जानने के लिए उस परिवेश में रहाना लाभदायक होगा या फिर उस संस्कृति की भाषा या साहित्य को पूर्ण रुप से ज्ञात करना होगा । समाज और संस्कृतियों में हो रहा विकास । अन्य संस्कृतियॊं की रीति –रीवाजों को स्विकार्य - अस्विकार्य की स्थिति भी समाज में निर्माण हो सकती है।


संस्कृतिक अनुवाद में संप्रेषण की समस्याऒं का समाधान : -

उदारीकरण और जागतिकाण पूर्व दो संकृतियों में अधिक असमानताएं होती थी जिसके चलते संप्रेषण में काफी समस्याएं उत्पन्न होती थी। उदारीकरण और जागतिकाण के बाद यह दूरी काफी कम हो चूकि है। इस स्थिति की ओर अनुवादक को विशेष ध्यान देना होगा। सांकृतिक शब्दों, मुहावरों, कहावतों को अधिकतर पाद टिप्पणी के द्वारा स्पष्ट किया जाता हैं। लेकिन कुछ विद्बानों का मानना है कि अगर ऎसे शब्दों की जगह ही स्पष्टिकरण दिया जाए तो पाठक को अधिक सहायता हो सकती है। पाद टिप्पणी के कारण पाठक की पठन प्रक्रिया में अवरोध आकर पाठक की पठन प्रक्रिया की लयात्मकता में बाधा उत्पन्न हो सकती है।

संप्रेषण के परिमाण (size of communication ) के कारण भी समस्याएं निर्माण होती है। आधुनिक युग की ओर देखा जाए तो संप्रेषण के लिए यह अधिक लाभ दायक होगा की पाठक जिस संस्कृति को अधिक समझता हो, अथवा उसके परिवेश को ध्यान मे रखते हुए संदेश को संप्रेषित करें। इस विधि के कारण संप्रेषक को सूचना ( संदेश ) अधिक प्रभावि रुप से संप्रेषित होगा। सूचना का प्रभाव संप्रेषण शैली अधिक निर्भर होता है इस लिए संप्रेषण शैली पर भी अधिक ध्यान होना चाहिए । इसी के साथ संप्रेषण में सहजता उत्पन्न करना, संस्कृतिक एकरुपता निर्माण करना, दो संस्कृतियों की तुलना कर कर असंदिग्धता दूर करना और पाठ का पुन:निरिक्षण करना आदि से संप्रेषण अधिक सफल होगा ।

उपसंहार : - एक संकृति का दूसरी संस्कृति में संप्रेषण होने से न केवल
उस संस्कृति की आलोचना होती है बल्कि उस समाज और संस्कृति का विकास भी होता है। संकृतिक समस्याओं का पूर्ण रुप से समाधान
होना तो कदापी संभव नहीं है। इसे ध्यान में रखते हुए अगर संप्रेषण के अन्य साधनों का अधिक से अधिक विकास किया जाए तो सांकृतिक संप्रेषण अधिक प्रभावि रुप से हो पाएगा। जैसे : - एक साधन "संकेत" है। देशों को संकेतो द्वार व्यक्त करने की प्रक्रिया संप्रेषण है यह संकेत कुछ भी हो
सकते है । खाने के लिए संकेत रुप में हम पाचों उगलियाँ एक साथ मिला कर
हाथ को ओठों तक ले जाते हैं। लगभग
अधिकतर भाषाओं में यही संकेत हैं।
विश्वमें कई हजार सांकृतिया हैं लेकिन अनुवाद ही एक एसी कड़ी हो जो समय दूरी और भेदभाव को खतम कर एकता
पैदा कर सकता है। भाषांतरकार और अनुवाद के बंध में यह कह सकते हैं कि जो अनुवाद संप्रेषण परक नहीं हो सकता वह अनुवाद संकृति का वाहक कभी नही हो
सकता।


------------------------------------------**********************---------------------------------------------------




संदर्भ
ग्रंथ : -

१.Theory and practice of Translation - Dr.Y.C.Bhatnagar

२. भाषा विज्ञान - महाविरसरन
जैन ( पेज – ११६ -११७ )

३.अनुवाद कला : सिद्धांत और कला

- कैलाश चन्द्र भाटिया

४. अनुवाद क्या है ?

- संपादन - राजमल बोरा

संदर्भ पत्रिका

१. समयांतर ( पत्रिका ) अनुवाद

  1. अनुवाद शतक ( page – 313 - 319 )

    Cultures Through Translation Sharad Chandra

  1. Babei Cultural Translation ( page – 3 - 5 ) Diri I.Teilanyo

इंटरनेट वेब साईट : -

१. http://www.rennert.com/translations/services_culturalconsult.htm

२. http://en.wikipedia.org/wiki/Cross-cultural_communication

३. enjamins.com/jbp/series/Target

Monday, February 25, 2008

solapur















A place of real translator

Ther are so many languages use at a same time . There Leaders are are know more then languges. They deal quations deffrent languages.

wich languages are the know

Marathi
Hindi
English
Urdu
Gujarati
Telegu
Kannada
Marwad

and so many dilacts also use.

HISTORICAL IMPORTANCE


The Solapur District was ruled by various dynesties such as Andhrabhratyas, Chalukyas, Rashtrkutas, Yadavas and Bahamanis. 'SOLAPUR' is believed to be derived from two words 'SOLA' meaning sixteen and 'PUR' meaning village. The present city of Solapur was considered tp be spread over sixteen villages viz. Aadilpur, Ahmedpur, Chapaldev, Fatehpur, Jamdarwadi, Kalajapur, Khadarpur, Khandervkiwadi, Muhammadpur, Ranapur, Sandalpur, Shaikpur, Solapur, Sonalagi, Sonapur and Vaidakwadi.
Recent research work however shows that the name SOLAPUR is derived not from the congregation of sixteen villages. It is evident from the inscriptions of
Shivayogi Shri.Siddheshwar of the time of the Kalachuristis of Kalyani, that the town was called 'Sonnalage' which came to be pronounced as 'Sonnalagi'. The town was known as Sonnalagi even upto the times of Yadavas. A sanskrit inscription dated Shake 1238, after the downfall of the Yadavas found at Kamati in Mohol shows that the town was known as Sonalipur. One of the inscriptions found in Solapur fort shows that the town was called Sonalpur while another inscription on the well in the fort shows that it was known as Sandalpur.
During the Muslim period, the town was known as Sandalpur. It is therefore most probably that that during the course of time the name Solapur was evolved by dropping 'na' from the name Sonalpur. Subsequently the British rulers pronounced Solapur as Sholapur and hence the name of the district.
The present Solapur district was previously part of Ahmednagar, Pune and Satara districts. In 1838 it became the Sub-district of Ahmednagar. It included Barshi, Mohol, Madha, Karmala, Indi, Hippargi and Muddebihal Sub-divisions. In 1864 this Sub-district was abolished. In 1871 this district was reformed joining the Sub-divisions viz. Solapur, Barshi, Mohol, Madha and Karmala and two Sub-divisions of Satara district viz. Pandharpur, Sangola and in 1875 Malshiras Sub-division was also attached. After the State reorganisation in 1956 Solapur was included in Mumbai State and it became a full fledged district of Maharashtra State in 1960.
The importance of Solapur is unique in the history of India in the sense that this district enjoyed the freedom even before independence. The citizens of Solapur enjoyed the Independence for three days from 9th to 11th May 1930. The brief history runs like this. After the arrest of Mahatma Gandhi in May 1930, protests and demonstrations against the British Rule were held throughout the India. Large scale rallies and protests were done at Solapur also. Many citizens lost their lives in the Police firings. Due to this the irate mob attacked the Police Stations. Out of fear the Police and other officers ran out of Solapur. During this period the responsibility of law, order and security of citizens was on the shoulders of congress party leaders. Then city congress President Shri.Ramkrishna Jaju, with his other congressmen maintained the law and order for a period of three days from 9th to 11th May 1930.
Secondly, the Solapur Municipal Council was the first Municipal Council of India to host the National Flag on the
Municipal Council building (Now Municipal Corporation) Solapur in 1930. The brief history runs like this. Taking the spirit of Dandi March from Mahatma Gandhi, the freedom fighters of Solapur decided to host the National Flag on the Solapur Municipal Council. Accordingly, senior freedom fighter from Pune Shri.Annasaheb Bhopatkar hosted the National Flag on 6th April 1930 on Municipal Council. This was the first and the unique incidence of such kind throughout the country. The British rulers, due to irritation declared the Marshall Law at Solapur and arrested many leaders and innocent citizens on false charges. The freedom fighters Shri.Mallappa Dhanshetti, Shri.Kurban Hussain, Shri.Jagnnath Shinde and Shri.Kisan Sarda were arrested on charges of killing two Policemen of Mangalwar Police Station. The lower court sentenced the punishment of hanging till death for these freedom fighters. The High Court also confirmed the same decision and these four freedom fighters were hanged till death on 12th January 1931. As a mark of respect to these freedom fighters, the Statues of these freedom fighters have been installed in the heart of the City and the location has been named as Hutatma Chowk.

Wednesday, January 2, 2008

homonomy word translation

homonomy word translation
I do not propose to say anything new here so much as to reexamine briefly some of the fundamental properties that have been recurrently predicated of 'natural languages' and to follow up some of the implications of what this reexamination reveals. The three properties we are going to take up, namely, arbitrariness, necessity, and the duality of patterning (respectively in §§ 1, 2, 3), are logically distinct from each other. It is true that they have frequently been confused with each other in the past, but that is all the more reason for making a special effort to keep them apart in mind.1
While considering arbitrariness and necessity, we can very well assume that Saussure's analysis of the linguistic sing into the significant and the signifié is an adequate one and not worry too much about the various refinements, elaborations, reservations, and revisions proposed by later thinkers. With pattern duality, as we shall see, it is another matter.
Having considered the three properties and their interrelations (§ 5).
1. Arbitrariness. Cross-linguistically, the relation between the significant and the signifié is arbitrary. There is no extra-linguistic reason2 why the given significant should not be correlated with other than its usual signifié in a given language, and vice versa. We are quite justified in laughing at the English soldier who criticized the French for calling a cabbage a shoe (Fr. Chou /šu/).
A symbolism is non-arbitrary when there is some sort of an appropriateness about it-for example, the geometrical similarity between a map and the original landscape, the similarity of responses that make darkness a symbol of ignorance, the stimulus-response relationship that makes bright red more suitable as a symbol of danger than, say, pale blue.

समय