Wednesday, August 13, 2008

कुछ कविताएं

जो मेरी नजर में आई और अच्छी लगी कुछ कविताए जिसे हर बार पढ़नेका मन करता है।
जो सिर्फ कविताए नही होती जिनका जज्बा बन जाती है। और फिर वहाँ से शुरू होता है जीने का कारवा।
ऐसी ही कुछ कवितायें, गजल, और शायरी मेरे ब्लाग पर डालने की कोशिश कर रहां हूँ। जिससे ब्लॉग केवल इक घिसा - पिटा सैधांतिक पक्ष ही नाराखे बल्कि ब्लाग पढ़ने वालों को प्रेरणा और कुछ रोमांस के पलों की भी सैर करवा लाये। यह कवितायें मेरी नहीं हैं। और कवितायें पूरी न होने से और संदर्भ पता न होने से कविता के लेखक का नाम भी नहीं दे पारहण हूँ।

"रातभर का है मेहमाँ अँधेरा
किसके रोके रुका है सवेरा । "

"सिर्फ हंगामा खडा करना मेरा मकसद नहीं ।
मेरी कोशिश है ये सूरत बदलनी चाहिए॥"

"तू खड़ा होके कहाँ मांग रहा है रोटी।
ये सियासत का नगर सिर्फ दगा देता है॥"

"यहां ताका आते आते सुख जाती है नदियाँ।
हमें पता है पानी कहाँ ठहरा हुवा है॥"

"हिम्मत से सच कहों तो बुरा मानते है लोग ।
रो-रो के बात कहने की आदत नहीं रहीं ॥"

"सोचा था उनके देशा में मंहगी है जिंदगी।
पर जिंदगी का भाव वहां और भी ख़राब ही॥"

सर से पावों में कभी , पेट से पावों में कभी,
एक जगह हो तो कहें दर्द इधर भी होता हैं।।"

" aaj ye divaar pardon ki taraha hilne lagi.
shart ye thi ki ye buniyaad hilni chahie..




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